क्या पत्नी का अपने पति को ‘सांवला और मोटा’ कहना मानसिक क्रूरता है? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि ऐसे आरोपों के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में पति की तलाक की अर्जी खारिज कर दी।
बिलासपुर (माटी स्क्रॉल): वैवाहिक विवादों में अक्सर अजीबो-गरीब मामले सामने आते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा, जहां एक पति ने इस आधार पर तलाक मांगा था कि उसकी पत्नी उसे ‘सांवला और मोटा’ कहकर अपमानित करती है। पति ने इसे मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) बताते हुए न्याय की गुहार लगाई थी। लेकिन, जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने पति की अपील को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि केवल ऐसे आरोपों के आधार पर वैवाहिक संबंध खत्म नहीं किए जा सकते।
क्या है पूरा मामला? जांजगीर-चांपा के रहने वाले आकाश घोष की शादी मार्च 2019 में रायगढ़ की पूजा सीत के साथ हुई थी। शादी के कुछ महीनों बाद ही दोनों के बीच अनबन शुरू हो गई। पति का आरोप था कि पत्नी बार-बार मायके चली जाती थी, उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी और उसे ‘मोटा व सांवला’ कहकर ताने मारती थी। पति के मुताबिक, पत्नी 25 दिनों के लिए राजस्थान गई और इसी दौरान उसके जुड़वां बच्चों का गर्भपात हो गया, जिसके बाद वह कभी ससुराल नहीं लौटी।
पत्नी ने पति पर लगाए गंभीर आरोप दूसरी तरफ, पत्नी ने पति के सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। पत्नी ने कोर्ट को बताया कि पति के किसी अन्य महिला के साथ अवैध संबंध थे। जब उसे इस बात का पता चला, तो पति ने शराब पीकर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। पत्नी का यह भी आरोप था कि गर्भावस्था के दौरान उसकी देखभाल नहीं की गई। जब तबीयत बिगड़ी, तो उसकी मां उसे इलाज के लिए मायके ले गई, जिसके बाद ससुराल वालों ने उसे वापस ले जाने की कोई कोशिश ही नहीं की।
20 लाख रुपये के मुआवजे का भी उठा मुद्दा सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि पति ने तलाक के लिए 20 लाख रुपये की पेशकश की थी। हालांकि, पत्नी ने स्पष्ट किया कि उसने तलाक के एवज में नहीं, बल्कि अपना जीवन यापन करने के लिए यह रकम एकमुश्त भरण-पोषण (Alimony) के रूप में मांगी थी। पत्नी की तरफ से पति और ससुराल वालों के खिलाफ घरेलू हिंसा (Domestic Violence) का केस भी दर्ज कराया गया था।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की तलाक की अर्जी? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मामले के हर पहलू और दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना। फैसले में कोर्ट ने मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जोर दिया:
- साक्ष्यों का अभाव: पति यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि पत्नी का व्यवहार मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। सांवला और मोटा कहने के आरोप को तलाक देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।
- अलग रहना ‘परित्याग’ नहीं: कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ अलग रहने का मतलब ‘परित्याग’ (Desertion) नहीं होता। पति को यह साबित करना होता है कि पत्नी ने बिना किसी ठोस कारण के जानबूझकर रिश्ता खत्म करने के इरादे से उसे छोड़ा है।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला: बेंच ने ‘समर घोष बनाम जया घोष’ मामले का जिक्र करते हुए कहा कि मानसिक क्रूरता तय करने का कोई एक तय फॉर्मूला नहीं है। इसे हर मामले की परिस्थितियों के अनुसार देखा जाता है।
हाईकोर्ट ने अंततः जांजगीर फैमिली कोर्ट द्वारा 28 अगस्त 2024 को दिए गए फैसले को बरकरार रखा, जिसमें तलाक की अर्जी नामंजूर कर दी गई थी।